रघु हँसता है और बोलता है, "जीत अब शुरू हुई है, बिल्लू।"
रघु—"नहीं माँ, मैंने तो बस एक डोरी पर चलना सीखा। असली वॉक तो अभी बाकी है—ज़िंदगी की डोरी पर, जहाँ हर दिन नया संतुलन माँगता है।"
लेकिन रघु को पता था—उसे ऊपर जाना है। एक दिन उसके हाथ लगती है की कहानी—फ्रांस में एक शख्स ने ट्विन टावर्स के बीच रस्सी पर चलकर इतिहास रच दिया। रघु का दिल धड़क उठता है। उसने ठान लिया—अब वह भी करेगा कुछ ऐसा। the walk movie in hindi
हवा चलती है। तार हिलता है। रघु के पैर काँपते हैं। उसे अपनी माँ की बात याद आती है— "पैर ज़मीन पर रखना।"
रघु कहता है—"साहब, हम सब ज़मीन पर चलते हैं। लेकिन जीने के लिए कभी-कभी आसमान पर चलना पड़ता है। मैंने सिर्फ ये दिखाया कि डर के बावजूद... इंसान सबसे ऊँचा चढ़ सकता है।" "जीत अब शुरू हुई है
लेकिन उस वक्त तो उसके पैर आसमान में हैं।
वह फिर से बीच में पहुँचता है, इस बार अपनी हारमोनियम बजाते हुए—बिना हाथ के—बस पैरों से तार पकड़े, धुन गूँजती है—"ज़िन्दगी डोर है, तू नाच ले..." —रघु आखिरी बार उतरता है, ज़मीन पर आता है। पुलिस उसे पकड़ लेती है। लेकिन हज़ारों लोग तालियाँ बजा रहे होते हैं। बिल्लू।" रघु—"नहीं माँ
माँ कहतीं, "बेटा, पैर ज़मीन पर रखना, वरना गिरोगे।"